श्री राम निवास सहायक

प्रोफेसर बीआरएम कॉलेज ऑफ गवर्नमेंट एजुकेशन

घरुंडा करनाल

सार-
अनेक भारतीय ऐसे हैं जो भारत से इतर देशों में हिंदी रचना व विकास के काम में लगे हुए हैं। इनमें दूतावास के अधिकारी और विदेशी विश्वविद्यालयों के प्राध्यापक तो हैं ही, अनेक सामान्य जन भी हैं जो नियमित लेखन व अध्यापन से विदेश में हिंदी को लोकप्रिय बनाने के काम में लगे हैं। विदेश में रहने वाले हिंदी साहित्यकारों का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्यों कि उनकी रचनाओं में अलग-अलग देशों की विभिन्न परिस्थितियों को विकास मिलता है और इस प्रकार हिंदी साहित्य का अंतर्राष्ट्रीय विकास होता है और समस्त विश्व हिंदी भाषा में विस्तार पाता है। बीसवीं शती के मध्य से भारत छोड़ कर विदेश जा बसने वाले लोगों की संख्या में काफी वृद्धि हुई। इनमें से अनेक लोग हिंदी के विद्वान थे और भारत छोड़ने से पहले ही लेखन में लगे हुए थे। ऐसे लेखक अपने अपने देश में चुपचाप लेखन में लगे थे पर उनमें से कुछ भारत में धर्मयुग जैसी पत्रिकाओं में प्रकाशित होकर काफी लोकप्रिय हुए, जिनका लोहा भारतीय साहित्य संसार में भी माना गया।