Mr Sandeep Kumar
Research Scholar
Dept.
Sanskrit,Pali &   Prakrit
K.U.K

सार-
धर्म का ज्ञान वेद से प्राप्त होता है। वेड सनातन शास्त्र है। वेद अनन्त है-अनन्ता वे वेदाः। वेद चार हैं-ऋग, यजुः, साम और अथर्व। इन चरों वेदों की अनेक संहिताएं है जिनको शाखाएं कहते है। इन संहिताओं में मंत्र होते है। इन मन्त्रों की व्याख्या जिन ग्रंथों में रहती है उन्हें ब्राह्मण कहते है। ब्राह्मण ग्रंथों के वे कठिन स्थल जिनका बोध एकांतवन में ही होता है उन्हें आरण्यक कहा जाता है। फिर मंत्र ब्राह्मण और आरण्यक के जो अर्थ या रहस्य हैं उन्हें उपनिषद कहा जाता है। सामान्यतः मंत्र और ब्राह्मण को वेद कहा जाता है और आरण्यक और उपनिषद को वेद का रहस्य कहा जाता है। यद्यपि लगभग 200 से ज्यादा उपनिषद है तथापि केवल 13 उपनिषद ही मुख्या है व अध्ययन व अध्यापन के काम में आते हैं इनमे से प्रमुख है -चन्दोगया , केना, ऐत्रेय, मुण्डका , तैत्रीयका, कौशितकि, प्रसना, इसा, मैत्री, बृहदरंयकय, स्वेतास्वत्रा, कथा।